रक्षाबंधन के मौके पर उत्तराखंड सरकार ने महिलाओं को बड़ी राहत देते हुए 28 और 29 अगस्त को रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की घोषणा की है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश की हजारों महिलाओं को अपने मायके जाने में मदद मिलेगी। लेकिन नैनीताल जिले के दूरस्थ ओखलकांडा ब्लॉक की बहनों के लिए यह सुविधा अभी भी पहुंच से दूर है।
ओखलकांडा ब्लॉक में करीब 75 ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन यहां रोडवेज बस सेवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सरकार की मुफ्त बस यात्रा का लाभ लेने से पहले ही महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचने की है।
ग्रामीण महिलाओं के मुताबिक, उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। इसके बाद भी रोडवेज बस की सुविधा नहीं मिलती। मायके या हल्द्वानी जाने के लिए उन्हें निजी वाहन या टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें काफी किराया खर्च करना पड़ता है।
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर जब बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने मायके जाना चाहती हैं, तब परिवहन की समस्या उनके सामने बड़ी परेशानी बन जाती है। कई महिलाएं तो आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण मायके नहीं जा पातीं और डाक के जरिए राखी भेजने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में कई वर्षों से रोडवेज बस सेवा की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ तभी पूरी तरह मिल पाएगा, जब सार्वजनिक परिवहन गांवों तक पहुंचे।
ओखलकांडा की महिलाओं ने सरकार से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित रोडवेज बस सेवा शुरू की जाए, ताकि उन्हें पैदल चलने और महंगी टैक्सी पर निर्भर रहने से राहत मिल सके। रक्षाबंधन पर फ्री बस सेवा का फैसला भले ही महिलाओं के लिए बड़ी राहत हो, लेकिन ओखलकांडा की बहनों के लिए सवाल अब भी वही है—जब गांव तक बस ही नहीं पहुंचेगी, तो मुफ्त सफर का लाभ आखिर कैसे मिलेगा?

