चमोली के विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में हुए हादसे के बीच दो कर्मचारियों की जिंदगी महज कुछ मिनट और एक चाय की वजह से बच गई। हादसे के दौरान टनल में काम कर रहे ऑपरेटर सुखदेव सिंह और फोरमैन कुलदीप वहां मौजूद नहीं थे। सुखदेव सिंह की कंक्रीट पंप मशीन सही तरीके से काम नहीं कर रही थी, जिसके चलते वह टनल से बाहर आ गए और अपने एक साथी के साथ चाय पीने चले गए।
सिवाई गांव निवासी 36 वर्षीय सुखदेव सिंह पिछले दस साल से अधिक समय से परियोजना में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हादसे वाले दिन वह करीब तीन से चार घंटे पहले ही टनल से बाहर आ चुके थे। मशीन में खराबी आने के कारण उनका टनल के अंदर काम करना संभव नहीं हो पाया। इसी दौरान उन्होंने फोरमैन कुलदीप को भी चाय पीने के लिए बुला लिया। कुलदीप चाय पीने में व्यस्त थे और इसी दौरान टनल के भीतर हादसा हो गया।
सुखदेव सिंह के मुताबिक अगर उस दिन मशीन सही तरीके से चल रही होती और सही ग्रेड का सीमेंट उपलब्ध होता, तो संभव है कि वह और कुलदीप भी हादसे के वक्त टनल के अंदर होते। हादसे का पता उस समय चला, जब टनल के भीतर मलबा और पानी तेजी से बहने लगा।
घटना के बाद परियोजना में काम कर रहे कर्मचारियों ने प्रशासन के पहुंचने का इंतजार नहीं किया और तत्काल बचाव कार्य में जुट गए। हादसे में कई श्रमिक घायल हुए, जिन्हें गंभीर चोटें आई हैं। वहीं, रेस्क्यू टीम लगातार टनल में फंसे लोगों और मलबे के बीच तलाश अभियान चला रही है।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि कभी-कभी महज कुछ मिनटों का अंतर जिंदगी और मौत के बीच फर्क बन जाता है। सुखदेव सिंह की मशीन में आई खराबी और उसके बाद चाय के लिए टनल से बाहर निकलना उनके लिए जिंदगी बचाने वाला फैसला साबित हुआ। हालांकि हादसे ने परियोजना में सुरक्षा व्यवस्था और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

