जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले की बेहद दुर्गम और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पाडर घाटी में स्वास्थ्य सेवाओं की नई उम्मीद लेकर पहुँचा द हंस फाउंडेशन। संस्था की ओर से 7 से 16 जुलाई 2026 तक ‘दृष्टि आई केयर मिशन एवं जनरल हेल्थ कैंप–2026’ का आयोजन किया गया। दस दिनों तक चले इस विशेष अभियान के माध्यम से घाटी के 125 सीमांत और दूरस्थ गांवों के हजारों ग्रामीणों को निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

अभियान के प्रथम चरण में गांधारी वैली के टुन, आलिया, खजरोनी, बटवास, सोहल, चाग्ग, मुथल और छिटू सहित कई गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। इन शिविरों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने गांव-गांव जाकर लोगों की जांच की और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराईं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जहां नियमित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचना कठिन है, वहां यह अभियान लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ।
द हंस फाउंडेशन के प्रेरणास्रोत माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज जी के आशीर्वाद से आयोजित इस अभियान में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। शिविरों में आंखों की जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श, पैथोलॉजिकल जांच, डायग्नोस्टिक सेवाएं, दवाइयों का निःशुल्क वितरण तथा मोतियाबिंद की सर्जरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
अभियान के दौरान 1,528 लोगों की विस्तृत नेत्र जांच की गई, जिनमें 106 मरीजों में मोतियाबिंद की पहचान हुई। इनमें से 78 मरीजों की सफल मोतियाबिंद सर्जरी विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा की गई। वहीं 726 लोगों को उनकी दृष्टि के अनुसार निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए। इसके अलावा 2,082 लोगों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। 1,045 लोगों के पैथोलॉजिकल एवं डायग्नोस्टिक परीक्षण किए गए, जबकि 66 मरीजों का ईसीजी परीक्षण भी किया गया। सभी जरूरतमंद मरीजों को आवश्यक दवाइयां भी निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।

प्राकृतिक सौंदर्य, झरनों और फूलों के लिए प्रसिद्ध पाडर घाटी आज भी अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से काफी हद तक वंचित रही है। ऐसे में यह स्वास्थ्य अभियान केवल चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं का उदाहरण बनकर सामने आया।
शासन-प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए द हंस फाउंडेशन, चिकित्सकों और सेवा में जुटे स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया। यह अभियान इस संकल्प का प्रतीक बना कि देश के सबसे दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना संभव है, यदि सेवा का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना हो।

