उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेशभर में हालात गंभीर बने हुए हैं। भूस्खलन और मलबा आने से 85 सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मौसम विभाग की चेतावनी के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी जिलों के अधिकारियों और आपदा राहत एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन से प्रदेशभर की स्थिति की जानकारी लेते हुए संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी, नदी-नालों के जलस्तर पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
प्रदेश में भूस्खलन के कारण अल्मोड़ा में 2, बागेश्वर में 10, चमोली में 20, देहरादून में 7, नैनीताल में 8, पौड़ी में 5, पिथौरागढ़ में 13, रुद्रप्रयाग में 6, टिहरी में 8 और उत्तरकाशी में 6 सड़कें बंद हैं। कई स्थानों पर सड़कें खोलने का काम जारी है।
रुद्रप्रयाग जिले में लगातार बारिश के बाद अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और श्रद्धालुओं से नदी तटों से दूर रहने की अपील की है।
ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर बढ़ने से त्रिवेणी घाट का आरती स्थल जलमग्न हो गया है। जल पुलिस और एसडीआरएफ लगातार लोगों को गहरे पानी में न जाने की चेतावनी दे रहे हैं।
टिहरी के घुत्तू में भारी भूस्खलन से एक वाहन मलबे में दब गया, जबकि कई मकानों के ऊपर मलबा आने से लोगों में दहशत का माहौल है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। उधर अगस्त्यमुनि में विजयनगर-तैला मोटर मार्ग फिर भूस्खलन के कारण बंद हो गया है, जिससे 80 से अधिक गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
मौसम विभाग ने देहरादून, चमोली और बागेश्वर के लिए ऑरेंज अलर्ट तथा अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

