उत्तराखंड में सड़क हादसों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच प्रदेश में कुल 1,272 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 775 लोगों की मौत हुई और 1,341 लोग घायल हुए। इन हादसों में पैदल चलने वाले लोग भी बड़ी संख्या में प्रभावित हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक वाहन और पैदल यात्री के बीच टक्कर के 280 मामले सामने आए, जिनमें 151 लोगों की जान चली गई।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ी समस्या फुटपाथों की स्थिति बताई जा रही है। देहरादून समेत कई शहरी इलाकों में फुटपाथ पर दुकानों का सामान, वाहन पार्किंग, ठेले और निर्माण सामग्री नजर आती है। ऐसे में राहगीरों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे तेज रफ्तार वाहनों के बीच हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा बिना जेब्रा क्रॉसिंग और सिग्नल का इंतजार किए सड़क पार करना भी दुर्घटनाओं की एक वजह बताई गई है। बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए यह स्थिति और ज्यादा जोखिम भरी हो सकती है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून और जुलाई में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सबसे ज्यादा रही। जून में 210 और जुलाई में 201 हादसे दर्ज किए गए। समय के लिहाज से शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा 235 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 142 लोगों की मौत हुई।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने नई नियमावली तैयार करने की बात कही है। उप परिवहन आयुक्त शैलेश कुमार तिवारी के अनुसार सड़क डिजाइन में पैदल यात्रियों के लिए अलग स्थान सुनिश्चित करने पर भी फोकस किया जा रहा है।
वहीं लोक निर्माण विभाग का कहना है कि जहां संभव होगा वहां फुटपाथ बनाए जाएंगे। देहरादून नगर निगम भी फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का दावा कर रहा है। हालांकि अतिक्रमण हटने के बाद दोबारा कब्जे की समस्या भी सामने आ रही है।
अब जरूरत सिर्फ अतिक्रमण हटाने की नहीं बल्कि सुरक्षित फुटपाथ, बेहतर क्रॉसिंग व्यवस्था और यातायात नियमों के पालन को मजबूत करने की है ताकि सड़कें पैदल यात्रियों के लिए भी सुरक्षित बन सकें।

