उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर बागेश्वर के मंडलसेरा स्थित देवकी लघु वाटिका एवं राष्ट्रीय कुमाउनी पुस्तकालय में पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तराखंड के संकल्प के साथ विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के दर्जा राज्य मंत्री एवं जलागम परिषद के उपाध्यक्ष शंकर सिंह कोरंगा ने वाटिका का भ्रमण कर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में आजीवन समर्पित वृक्ष मित्र किशन सिंह मलड़ा के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज को प्रकृति संरक्षण के लिए ऐसे प्रयासों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
भ्रमण के दौरान देवकी देवी ने पारंपरिक रूप से पुष्प और हरेला अर्पित कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा उन्हें सीलिंग और चंदन के पौधे भेंट किए। इस अवसर पर शंकर सिंह कोरंगा ने वाटिका में संचालित पौधालय का निरीक्षण किया और यहां से निशुल्क पौध वितरण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मुगा रेशम की खेती का भी अवलोकन किया और इसे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। भ्रमण के दौरान दुर्लभ प्रजाति की श्रेणी में शामिल हो चुके सीलिंग महावृक्ष के संरक्षण पर विशेष चर्चा हुई। इस पर दर्जा राज्य मंत्री ने संबंधित निदेशक को इस महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजाति के संरक्षण के लिए आवश्यक शासकीय जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।
वाटिका समिति के सदस्यों ने परिसर की सुरक्षा के लिए मुख्य द्वार, चबूतरा, चेतना कक्ष तथा राष्ट्रीय कुमाउनी पुस्तकालय के निर्माण कार्यों की मांग भी रखी। इस पर शंकर सिंह कोरंगा ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए विस्तृत प्राक्कलन तैयार कर संबंधित विभाग को भेजने के निर्देश दिए, ताकि प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि हरेला केवल पौधरोपण का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संदेश देने वाला लोकपर्व है। प्रत्येक नागरिक को पौधे लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प लेना चाहिए, तभी पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य सफल होगा।
कार्यक्रम में धीरेंद्र परिहार, डॉ. कमल कोरंगा, नवीन मेहरा, चंद्रेश कोरंगा, योगेश बिष्ट, सचिन, प्रशांत मलड़ा, भजन सिंह, रमेश चंद्र, रमेश पर्वतीय, राम सिंह, देवकी देवी, ममता देवी, पूर्व ग्राम प्रधान रमा देवी, मनीषा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

