गलज्वाड़ी
राजधानी देहरादून से सटे गलज्वाड़ी इलाके में जंगल की जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण ने प्रशासन और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। यहां पहले छोटी-छोटी झोपड़ियां बनाई गईं और अब उन्हीं के सहारे पक्के मकानों का निर्माण शुरू हो चुका है। जंगल के बीचों-बीच तेजी से खड़ी हो रही यह बस्ती कई बड़े सवाल खड़े कर रही है।
मामला देहरादून वन प्रभाग की मालसी रेंज के अंतर्गत आने वाले राजस्व वन क्षेत्र का है। वन विभाग की टीम ने जब मौके पर पहुंचकर जांच की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक अंगेलिया के जादर और इंदिरानगर इलाके में करीब 12 परिवारों द्वारा अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। जांच के दौरान वहां साल के कटे हुए पेड़ों के ठूंठ भी मिले, जिससे साफ संकेत मिला कि जमीन कब्जाने के लिए जंगल को नुकसान पहुंचाया गया।
इस पूरे मामले का कनेक्शन चर्चित अंगेलिया हाउसिंग जमीन विवाद से भी जुड़ता नजर आ रहा है। करीब सात हजार बीघा जमीन से जुड़े इस विवाद ने वर्षों तक उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासन को हिलाकर रखा था। इस मामले को सबसे पहले वर्ष 2004 में अधिवक्ता राजेश सूरी ने उठाया था। लेकिन वर्ष 2014 में हाईकोर्ट से लौटते समय उनकी हत्या कर दी गई थी। बाद में फर्जी दस्तावेजों और कथित फर्जी हाईकोर्ट आदेशों के जरिए जमीन कब्जाने के आरोप भी सामने आए। मामला इतना बड़ा था कि सीबीआई जांच तक के आदेश देने पड़े।
अब उसी विवादित क्षेत्र में दोबारा अवैध निर्माण की खबरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जंगल की जमीन पर कब्जा करने वालों के पीछे कौन लोग हैं? क्या इसमें किसी बड़े भूमाफिया या नेटवर्क की भूमिका है? और सबसे अहम सवाल… क्या इस बार प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा या फिर मामला सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाएगा? फिलहाल वन विभाग ने अपनी रिपोर्ट तहसील प्रशासन को सौंप दी है। लेकिन स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों की नजर अब कार्रवाई पर टिकी है। क्योंकि अगर जंगलों पर ऐसे ही कब्जे होते रहे, तो आने वाले समय में हरियाली की जगह सिर्फ कंक्रीट का जंगल दिखाई देगा।

