देहरादून और आसपास के इलाकों में जमीन खरीदने वालों के लिए एक बार फिर बड़ी चेतावनी सामने आई है। सपनों का घर बनाने या कारोबार के लिए जमीन खरीदने से पहले पूरी जांच पड़ताल नहीं की गई तो जीवनभर की कमाई गंवानी पड़ सकती है। जिले में कई ऐसी जमीनें हैं जिनकी खरीद-फरोख्त पर कानूनी रोक लगी हुई है। इसके बावजूद बिचौलियों के जरिए इन जमीनों के सौदे कराए जाने के मामले सामने आते रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक देहरादून में गोल्डन फॉरेस्ट और पीएसीएल जैसी कंपनियों की कई संपत्तियां विवादों में हैं। इन संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लागू है। बताया गया है कि जिले में कुल 73 प्रतिबंधित खसरा नंबर हैं। इनमें से 52 खसरे विकासनगर क्षेत्र में बताए गए हैं। इसके अलावा स्थानीय अदालतों और हाईकोर्ट के आदेश के चलते भी कई जमीनों पर खरीद-फरोख्त की रोक लगी हुई है।
प्रशासन की ओर से प्रतिबंधित खसरों की सूची ई-रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही संबंधित सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी इन खसरों की सूची चस्पा की गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जमीन में निवेश करने से पहले खसरा नंबर और जमीन की कानूनी स्थिति की पूरी जानकारी जरूर हासिल करें।
प्रतिबंध के बावजूद जमीन के फर्जी या विवादित सौदों के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब 25 एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। चार साल पहले एसटीएफ ने भी जमीन के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया था।
सिर्फ प्रतिबंधित खसरों ही नहीं बल्कि देहरादून के आसपास सरकारी जमीन और आरक्षित वन भूमि को लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत है। कुछ मामलों में आरक्षित वन भूमि और नदी क्षेत्र की जमीन के सौदे किए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
ऐसे में प्रशासन की सलाह साफ है कि जमीन खरीदने से पहले दस्तावेजों की जांच करें और संबंधित विभागों से जमीन की स्थिति की पुष्टि जरूर करें। थोड़ी सी लापरवाही आपकी जीवनभर की कमाई को खतरे में डाल सकती है।

