देहरादून कैंट
राजधानी देहरादून की कैंट विधानसभा सीट एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गई है। वर्ष 1985 से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ रही यह सीट अब नए राजनीतिक समीकरणों और संभावित दावेदारों को लेकर सुर्खियों में है। मौजूदा विधायक सविता कपूर की बढ़ती उम्र के बीच भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्टी कपूर परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएगी या किसी नए चेहरे पर भरोसा जताएगी।
देहराखास सीट से शुरू हुआ कपूर परिवार का राजनीतिक सफर आज भी कैंट विधानसभा में प्रभाव बनाए हुए है। स्वर्गीय हरबंस कपूर ने लगातार कई चुनाव जीतकर इस सीट को भाजपा का अभेद्य किला बनाया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में उनके निधन के बाद भाजपा ने उनकी पत्नी सविता कपूर को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज कर पार्टी की पकड़ को और मजबूत किया।
अब आगामी चुनावों को लेकर भाजपा के भीतर सक्रियता तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश मंत्री आदित्य चौहान लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वहीं भाजपा नेता विनय गोयल, जोगेंद्र सिंह पुंडीर और महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल भी संगठन और जनता के बीच अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में जुटे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि पार्टी युवा और सक्रिय चेहरे पर दांव लगाएगी या फिर हरबंस कपूर के पुत्र अमित कपूर को मौका देकर राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएगी।
कैंट विधानसभा सीट सामाजिक और जातीय समीकरणों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां पूर्व सैनिकों, गोरखा समुदाय, पंजाबी और व्यापारी वर्ग के साथ पर्वतीय मूल के मतदाताओं का बड़ा प्रभाव है। भाजपा लंबे समय से इन वर्गों में मजबूत पकड़ बनाए हुए है।
ऐसे में आने वाले समय में कैंट विधानसभा सीट पर भाजपा का फैसला न केवल देहरादून बल्कि पूरे उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा संदेश देने वाला माना जा रहा है।

