उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में मानसून अब आफत बनकर बरस रहा है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। कहीं भूस्खलन से सड़कें बंद हैं, कहीं बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई है, तो कहीं नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। मौसम विभाग ने तीनों राज्यों के लिए हाई अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
उत्तराखंड में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण हालात सबसे अधिक प्रभावित नजर आ रहे हैं। राज्य में एक राष्ट्रीय राजमार्ग और दो स्टेट हाईवे समेत कुल 91 सड़कें बंद हो गई हैं। सबसे ज्यादा असर पौड़ी गढ़वाल में देखने को मिला है, जहां 21 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा चमोली में 19, टिहरी में 17 और पिथौरागढ़ में 10 सड़कें मलबा आने के कारण बाधित हैं। लोक निर्माण विभाग सड़कें खोलने में जुटा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और पहाड़ियों से गिर रहा मलबा राहत कार्य में बड़ी चुनौती बना हुआ है।
प्रदेश की नदियों और बांधों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। उत्तरकाशी में भागीरथी नदी और बदरीनाथ क्षेत्र में अलकनंदा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। राज्य के 11 बांध और बैराजों में भी पानी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है।
वहीं जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग और पहलगाम में बादल फटने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अचानक आई बाढ़ से नदी-नालों में तेज बहाव देखने को मिला। हालांकि प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के चलते किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में बचाव दल तैनात कर दिए गए हैं।
उधर हिमाचल प्रदेश में भी अगले पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, चंबा समेत कई जिलों में बिजली गिरने, तेज हवाएं चलने और भूस्खलन की आशंका जताई है। प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों से नदी-नालों, पहाड़ी ढलानों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की है।
मानसून के इस दौर ने एक बार फिर पहाड़ी राज्यों की चुनौतियों को बढ़ा दिया है। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए आने वाले कुछ दिन अभी भी बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।

