उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी हाकम सिंह की करीब 63 लाख रुपये की चल और अचल संपत्ति अटैच कर दी है। ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में चयन कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब एक करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह रकम स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा और ग्राम विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों से ली गई थी। आरोप है कि पेपर लीक कराने और चयन का झांसा देकर उम्मीदवारों से मोटी रकम वसूली गई।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी आरएमएस टेक सॉल्यूशन के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भी कथित भूमिका रही है। एजेंसी अब धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के एंगल से पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी गहन पड़ताल की जा रही है।
यह मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड की भर्ती प्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। राज्य सरकार ने इसके बाद नकल और पेपर लीक पर सख्ती के लिए उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं उपाय) अधिनियम लागू किया। इस कानून के तहत पेपर लीक, परीक्षा में धांधली या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ बेहद कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
नए कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति, परीक्षा केंद्र का प्रबंधन, कोचिंग संस्थान, प्रिंटिंग प्रेस या परीक्षा आयोजन से जुड़ा कोई भी व्यक्ति पेपर लीक या नकल में शामिल पाया जाता है, तो उसे आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही यह अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और अशमनीय श्रेणी में रखा गया है।

