बागेश्वर से सामने आई यह कहानी आंखें नम करने के साथ-साथ रिश्तों की खूबसूरती का एहसास भी कराती है। एक घर में जिस दिन नवजात के आने की खुशी थी, उसी दिन परिवार ने बच्चे की मां को हमेशा के लिए खो दिया। मां की ममता से महरूम हुए इस नन्हे बच्चे के लिए अब उसकी बुआ ने मां का रूप लेकर जिम्मेदारी संभाल ली है।
ग्राम मैगरी स्टेट निवासी भावना देवी पत्नी मुकेश सिंह ने कुछ दिन पहले बेटे को जन्म दिया। प्रसव के दौरान उनकी दुखद मृत्यु हो गई। परिवार में बच्चे के जन्म की खुशी कुछ ही पलों में मातम में बदल गई। जन्म लेते ही मां का साया सिर से उठ जाने के बाद बच्चे के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके पालन-पोषण की थी।
लेकिन इस मुश्किल घड़ी में बच्चे की बुआ ने आगे बढ़कर उसे अपने आंचल का सहारा दिया। वर्तमान में नवजात स्याली स्टेट में अपनी बुआ के पास है। बुआ उसे अपने बच्चे की तरह स्नेह, दुलार और संरक्षण दे रही हैं और उसके लालन-पालन की जिम्मेदारी पूरी आत्मीयता से निभा रही हैं।
मां की जगह दुनिया में कोई नहीं ले सकता, लेकिन मां के जाने के बाद किसी नन्हे जीवन को ममता की छांव देना त्याग और संवेदना की मिसाल जरूर है। परिवार के इस दुख में वन विभाग के अधिकारी भी उनके साथ खड़े नजर आए।
प्रभागीय वनाधिकारी बागेश्वर प्रकाश चंद्र आर्य ने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। इस दौरान गढ़खेत वन रेंज के वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप कांडपाल, बागेश्वर उपप्रभाग के प्रभारी उप प्रभागीय वनाधिकारी महेंद्र सिंह गुसाईं, स्याली स्टेट के ग्राम प्रधान चंदन सिंह और मैगरी स्टेट के ग्राम प्रधान दीपक सिंह रावत समेत ग्रामीण और मातृशक्ति मौजूद रही।
एक तरफ परिवार भावना देवी को खोने के गम से गुजर रहा है, तो दूसरी तरफ इस नन्ही जान के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी भी सामने है। इस जिम्मेदारी को उसकी बुआ ने मां की तरह अपने कंधों पर उठा लिया है।
यह कहानी सिर्फ एक दुखद घटना नहीं, बल्कि उस ममता की मिसाल है जो रिश्तों की सीमाओं से कहीं आगे होती है। मां की गोद भले ही छिन गई हो, लेकिन बुआ के रूप में इस बच्चे को ममता की एक नई छांव जरूर मिल गई है।

