उत्तराखंड वन विभाग में तबादलों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभागीय मुख्यालय की ओर से कई संवर्गों के कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले किए जाने के बाद भी बड़ी संख्या में कर्मचारी अब तक अपनी पुरानी तैनाती वाली जगहों पर ही काम कर रहे हैं। खास बात यह है कि कर्मचारियों को रिलीव करने के लिए विभाग के मुखिया यानी प्रमुख वन संरक्षक हॉफ की ओर से 30 सितंबर तक की स्पष्ट समयसीमा भी तय की गई थी, लेकिन डेडलाइन खत्म होने के बाद भी कई जगहों पर आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ।
वन विभाग की ओर से फॉरेस्ट गार्ड, फॉरेस्टर, डिप्टी रेंजर और रेंजर समेत कई संवर्गों की तबादला सूची पहले ही जारी की जा चुकी थी। इसका उद्देश्य लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों को नई जगह भेजना और अनुरोध के आधार पर लंबित तबादला मामलों का निस्तारण करना था। लेकिन आदेश जारी होने के बाद भी कई कर्मचारियों को उनके संबंधित वन क्षेत्रों से कार्यमुक्त नहीं किया गया।
मामले को लेकर वन मुख्यालय ने अब उन वन क्षेत्रों की रिपोर्ट मांगनी शुरू कर दी है, जहां तबादला सूची के मुताबिक कर्मचारियों को रिलीव नहीं किया गया। मानव संसाधन से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी देख रहे CCF पीके पात्रो के मुताबिक, निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद अब संबंधित क्षेत्रों से रिपोर्ट ली जा रही है।
बताया गया है कि कर्मचारियों को रिलीव करने के लिए मुख्यालय स्तर से पहले भी संबंधित अधिकारियों के साथ पत्राचार किया गया था। इसके बावजूद कई स्थानों पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।
तबादला आदेशों के पालन को लेकर फॉरेस्टर संघ भी नाराजगी जता चुका है। संघ के अध्यक्ष स्वरूप चंद्र रमोला ने सूची के अनुसार कर्मचारियों को नई तैनाती पर भेजने की मांग उठाई है।
अब मुख्यालय की रिपोर्ट पर सभी की नजरें हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन वन क्षेत्रों में तबादला आदेशों का पालन नहीं हुआ और आगे क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि विभागीय मुखिया की तय डेडलाइन के बावजूद आदेशों का पालन क्यों नहीं हो पाया।

