चमोली के तमक नाले में अतिवृष्टि के बाद आए तेज बहाव और मलबे ने भारी तबाही मचाई। 10 अगस्त को उफान पर आए तमक नाले की चपेट में आने से चीन सीमा को जोड़ने वाला बैली ब्रिज बह गया। इसी दौरान सीमा सड़क संगठन यानी BRO की 123 इकाई में तैनात चालक पंकज रुधौला भी तेज बहाव में बह गए और तभी से लापता हैं।
लापता जवान की तलाश में पिछले छह दिनों से लगातार रेस्क्यू और सर्च अभियान चलाया जा रहा है। दुर्गम इलाका और भारी मलबा अभियान में चुनौती बना हुआ है। रेस्क्यू टीमें तमक नाले के आसपास मलबे, बोल्डरों, जलधाराओं और किनारों पर संभावित स्थानों को चिन्हित कर बारीकी से तलाशी ले रही हैं।
अभियान में दो एक्सकेवेटर की मदद से भारी बोल्डर और मलबा हटाया जा रहा है। इसके साथ ही गढ़वाल राइफल्स के जवान, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी सर्च ऑपरेशन में जुटी हैं। संभावित स्थानों की तलाश के लिए दो सर्च एंड रेस्क्यू डॉग को भी लगाया गया है।
दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निगरानी के लिए ड्रोन की सहायता ली जा रही है। रेस्क्यू टीमों का फोकस उन सभी जगहों पर है, जहां तेज पानी के साथ जवान के बहकर पहुंचने की संभावना हो सकती है। मलबे के नीचे और बड़े बोल्डरों के आसपास भी गहन तलाशी की जा रही है।
अधिकारियों और रेस्क्यू टीमों की कोशिश है कि तमक नाले के आसपास कोई भी संभावित स्थान बिना जांच के न छूटे। लगातार बारिश और नाले में पानी के बहाव के बीच जवान की तलाश चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। फिलहाल छह दिन बीत जाने के बाद भी पंकज रुधौला का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। परिवार और साथी जवान उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं, जबकि रेस्क्यू टीमें लगातार अभियान में जुटी हुई हैं।

