देहरादून। उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में सफलता हासिल कर एसडीएम बनने वाली काजल सैनी आज प्रदेश के युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई हैं। हरिद्वार जिले के झबरेड़ा क्षेत्र के सड़ौली गांव की रहने वाली काजल ने अपने संघर्ष, मेहनत और परिवार के सहयोग के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
काजल सैनी एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता रामकुमार किसान हैं, जबकि उनकी मां राजदुलारी गृहिणी हैं। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी काजल ने अपनी शुरुआती शिक्षा राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, लंढौरा से पूरी की। इसके बाद उन्होंने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से बीएएमएस की पढ़ाई की। हालांकि मेडिकल क्षेत्र में पढ़ाई करने के बावजूद उनका मन प्रशासनिक सेवा में था और उन्होंने इसी दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया।
काजल बताती हैं कि बचपन में गांव के एक शिक्षक उन्हें एसडीएम और प्रशासनिक अधिकारियों के बारे में बताया करते थे। उसी समय उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना जन्मा। बीएएमएस के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। इस दौरान उन्हें कई बार असफलताओं का सामना भी करना पड़ा। यूपीएससी, पीसीएस और लोअर पीसीएस जैसी परीक्षाओं में शुरुआती प्रयास सफल नहीं रहे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
अक्टूबर 2025 में काजल ने सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा उत्तीर्ण कर सचिवालय में नियुक्ति हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और आखिरकार उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में सफलता प्राप्त कर एसडीएम बनने का सपना साकार कर लिया।
काजल अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उनका कहना है कि परिवार ने कभी शादी का दबाव नहीं बनाया और हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी। माता-पिता का यही विश्वास और समर्थन उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। काजल का मानना है कि बेटियों को अवसर और विश्वास मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।
युवाओं को संदेश देते हुए काजल कहती हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मजबूत आधार, निरंतर अध्ययन, सकारात्मक माहौल और परिवार का सहयोग सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उनका यह सफर आज हजारों युवाओं को यह विश्वास दिलाता है कि कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

