"उत्कृष्ट देशभक्ति पदक
देहरादून के लोकभवन में राष्ट्रीय सैनिक संस्था द्वारा “नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा” विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट गुरमीत सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया। इसी अवसर पर बजरंग दल के गौ रक्षा प्रमुख नरेश उनियाल को राष्ट्रसेवा, सामाजिक योगदान और देशभक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए “उत्कृष्ट देशभक्ति पदक” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके राष्ट्रहित और समाजसेवा में दिए गए योगदान के लिए प्रदान किया गया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट गुरमीत सिंह ने कहा कि आज का समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक का है। बदलती दुनिया में तकनीकी शिक्षा जितनी आवश्यक है, उतना ही जरूरी है कि हमारी युवा पीढ़ी नैतिक मूल्यों, चरित्र, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम से भी सशक्त बने। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला संस्कारवान और जिम्मेदार युवा ही हैं।
राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद, उपनिषद और ऋषि-मुनियों की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आज भी जीवन मूल्यों की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के आचरण और व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए। यदि शिक्षा के साथ संस्कार और नैतिक मूल्य जुड़ेंगे, तभी समाज और राष्ट्र का समग्र विकास संभव होगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय सैनिक संस्था जैसे संगठन तथा देश के पूर्व सैनिक अपने अनुभव, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सेवा भाव के माध्यम से नई पीढ़ी में राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कई अन्य सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य नई शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं में नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रसेवा की भावना को सशक्त बनाने का संदेश देना रहा।

