देहरादून में भाजपा पार्षद के घर हुई लूट की वारदात के बाद घरेलू सहायकों के रूप में घरों में दाखिल होकर अपराध करने वाले गिरोहों को लेकर पुलिस की चिंता बढ़ गई है। जांच में ऐसे मामलों का एक पैटर्न सामने आया है, जिसमें आरोपी पहले घरेलू नौकर बनकर परिवार का विश्वास हासिल करते हैं और फिर मौका मिलते ही वारदात को अंजाम देते हैं।
देश के कई शहरों में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हैदराबाद, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी घरेलू सहायकों से जुड़े लूट और चोरी के मामले जांच का हिस्सा रहे हैं। कुछ मामलों में आरोपियों पर परिवार को खाने या चाय में नशीला पदार्थ देकर बेहोश करने और फिर नकदी व जेवरात लेकर फरार होने के आरोप लगे हैं।
जून 2026 में हैदराबाद के एक आलीशान विला में काम करने वाले नेपाली नौकर दंपती पर रिश्तेदार के साथ मिलकर करीब 12 करोड़ रुपये के जेवरात और कीमती सामान चोरी करने का आरोप लगा था। पुलिस ने बाद में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
राजस्थान के नीमकाथाना में भी सितंबर 2026 में एक स्कूल प्रबंध निदेशक के घर काम करने वाली नेपाली नौकरानी पर साथियों के साथ मिलकर परिवार को नशीला पदार्थ खिलाने और नकदी-जेवर लेकर फरार होने का आरोप लगा।
जयपुर और जोधपुर में भी ऐसे मामलों की जांच में घरेलू सहायकों की भूमिका सामने आ चुकी है। कुछ मामलों में आरोपियों पर वारदात के बाद नेपाल भागने की कोशिश करने का भी आरोप लगा।
देहरादून की हालिया घटना में भी नेपाली नौकर पर परिवार को नशीला पदार्थ खिलाकर घर में चोरी करने का आरोप है। पुलिस अब इस मामले के साथ-साथ ऐसे गिरोहों के संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती घरेलू सहायकों की पहचान और उनके पुराने रिकॉर्ड का सत्यापन सुनिश्चित करना है। ऐसे में घर में किसी भी कर्मचारी को रखने से पहले उसका पहचान पत्र, स्थायी पता और पुलिस सत्यापन कराना जरूरी माना जा रहा है।
फिलहाल देहरादून की वारदात के बाद घरेलू सहायकों के सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। भरोसा जरूरी है लेकिन किसी अनजान व्यक्ति को घर में रखने से पहले उसकी पूरी जानकारी की जांच करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

