उत्तराखंड में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अनर्गल टिप्पणियां करने वाले शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सोशल मीडिया पर मर्यादा भूलकर टिप्पणी करने वाले शिक्षकों पर शिक्षा विभाग सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में प्रदेश के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। साथ ही ऐसे मामलों में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट निदेशालय को भेजने के लिए भी कहा गया है।
दरअसल, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय उत्तराखंड ने सोशल मीडिया पर शिक्षकों और कर्मचारियों की ओर से की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों को गंभीरता से लिया है। निदेशक विनोद प्रसाद सिमल्टी की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि इस तरह की टिप्पणियां उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली-2002 का उल्लंघन हैं।
निदेशालय ने नियमावली के नियम 3(1), 3(2) और नियम 7 का हवाला देते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारियों का इस तरह का व्यवहार विभाग और राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे कृत्य किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।
निर्देशों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर अनर्गल या आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को चिह्नित किया जाएगा। उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, संबंधित अधिकारियों को की गई कार्रवाई की जानकारी साक्ष्यों सहित नियुक्ति प्राधिकारी और माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध करानी होगी।
खास बात यह है कि शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में पहले भी 23 फरवरी को निर्देश जारी किए गए थे। उस समय भी अधिकारियों को सोशल मीडिया पर अनर्गल टिप्पणी करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया था। इसके बावजूद ऐसे मामले सामने आने के बाद निदेशालय ने एक बार फिर सख्ती दिखाई है।
अब विभाग के इन निर्देशों के बाद सोशल मीडिया पर अपनी राय और टिप्पणी व्यक्त करने वाले सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। हालांकि, कार्रवाई नियमों और संबंधित मामले के तथ्यों के आधार पर ही की जाएगी।

