देशभर में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। जहां एक ओर विपक्षी दलों ने इसे छात्रों के संघर्ष और लोकतंत्र की जीत बताया, वहीं आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” उन्होंने कहा कि यह लाखों छात्रों, युवाओं और अभिभावकों की एकजुट आवाज की जीत है। उनके मुताबिक, जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन अब पूरे देश में छात्रों की ताकत का प्रतीक बन गया है और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज ने सरकार को जवाबदेही तय करने के लिए मजबूर किया।
इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक खुला पत्र जारी किया। उन्होंने लिखा कि देश में बने हालात का फायदा कोई देश-विरोधी तत्व न उठा सके, छात्र कानूनी विवादों में न उलझें और अपनी पढ़ाई तथा करियर पर ध्यान दे सकें, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में नैतिक जिम्मेदारी सर्वोपरि होती है।
उधर, विपक्ष ने भी इस फैसले को छात्र आंदोलन की बड़ी सफलता बताया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और उन सभी छात्रों को बधाई दी जिन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे लाखों युवाओं की जीत बताते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग दोहराई।
एनसीपी-एससीपी प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि छात्रों के शांतिपूर्ण संघर्ष ने सरकार को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने पर मजबूर किया।
अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि नया शिक्षा मंत्री कौन होगा और भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए सरकार कौन-कौन से ठोस कदम उठाएगी।

