फूलों की घाटी
चमोली। प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकिंग के शौकीनों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। विश्व धरोहर स्थल ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ यानी फूलों की घाटी आगामी 1 जून से पर्यटकों के लिए खोल दी जाएगी। इसके लिए पार्क प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। हिमालय की गोद में बसी यह खूबसूरत घाटी एक बार फिर रंग-बिरंगे फूलों, दुर्लभ वनस्पतियों और प्राकृतिक सौंदर्य से सैलानियों का स्वागत करने को तैयार है।
वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क की रेंज ऑफिसर चेतना कांडपाल ने घाटी का निरीक्षण करने के बाद बताया कि प्रवेश द्वार को खोलने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शीतकालीन बर्फबारी से क्षतिग्रस्त हुए पैदल मार्गों की मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित बनाया गया है। साथ ही बामन धोड़ और स्यूचंद नाले में अस्थायी पुलों का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है, जिससे पर्यटकों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
इस बार घाटी की यात्रा और भी खास रहने वाली है। पर्यटक फूलों की खूबसूरती के साथ-साथ घोसा नाले और लेगी नाले में मौजूद हिमखंडों का भी दीदार कर सकेंगे। पार्क प्रशासन द्वारा लगातार गश्त और निगरानी की जा रही है ताकि पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल फूलों की घाटी अपनी अद्भुत जैव विविधता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां हर वर्ष 300 से अधिक प्रजातियों के हिमालयी पुष्प खिलते हैं। जून के मध्य से अगस्त तक घाटी पूरी तरह फूलों की चादर से ढक जाती है और इसका नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। इन दिनों भी घाटी में कई प्रजातियों के फूल खिलने शुरू हो चुके हैं।
समुद्र तल से लगभग 12,995 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान करीब 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान का हिस्सा है। यहां दुर्लभ तितलियां, औषधीय जड़ी-बूटियां, प्राकृतिक झरने, पुष्पावती नदी, विशाल ग्लेशियर और बर्फ से ढकी चोटियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
हर वर्ष 1 जून से 31 अक्टूबर तक खुलने वाली यह घाटी देश-विदेश के हजारों पर्यटकों को आकर्षित करती है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार भी बड़ी संख्या में सैलानी यहां पहुंचेंगे और उत्तराखंड की प्राकृतिक धरोहर का आनंद लेंगे।

