चमोली के देवाल क्षेत्र के पिनाऊं गांव में सड़क सुविधा नहीं होने की वजह से एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान ग्रामीणों ने डंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाया। गांव के लिए सड़क को मंजूरी मिले 11 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी सड़क निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में पैदल रास्तों और डंडी के सहारे ही मरीजों को सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है।
बुधवार को पिनाऊं गांव की आंगनबाड़ी कार्यकत्री खिमुली देवी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। हालत को देखते हुए ग्रामीणों ने उन्हें डंडी के सहारे करीब छह किलोमीटर का खतरनाक पैदल रास्ता तय कराकर बलाण गांव के कालीताल क्षेत्र तक पहुंचाया। बताया गया कि पिनाऊं से बलाण तक का पैदल मार्ग भी क्षतिग्रस्त था। ग्रामीणों ने रास्ते को किसी तरह ठीक किया और गर्भवती महिला को पाटिंगधार तक पहुंचाया।
ग्राम प्रधान लखपत दानू के मुताबिक सुबह करीब 11 बजे महिला को डंडी से पाटिंगधार लाया गया। इसके बाद ग्रामीण शाम करीब साढ़े पांच बजे तक हेलीकॉप्टर का इंतजार करते रहे, लेकिन हेलीकॉप्टर नहीं पहुंच सका। इसके बाद शाम छह बजे महिला को कालीताल के सड़क मार्ग तक पहुंचाया गया।
इसके बाद ग्रामीणों ने रात करीब साढ़े नौ बजे गर्भवती महिला को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल पहुंचाया। यहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण महिला को एंबुलेंस से जिला अस्पताल बागेश्वर भेजा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पिनाऊं गांव के लिए वर्ष 2015 में 23 किलोमीटर लंबी धुराधारकोट-वांक-पिनाऊं सड़क को मंजूरी मिली थी। लेकिन 11 साल बीतने के बाद भी सड़क गांव तक नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क नहीं होने के कारण बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को आए दिन डंडी के सहारे अस्पताल ले जाना पड़ता है।
वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता मनीष डोगरा के अनुसार सड़क के निर्माण में वन भूमि से जुड़े मामलों की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि लोहाजंग से वांक गांव तक सड़क बन चुकी है और ग्रामीणों की सहमति होने पर वांक से पिनाऊं तक सड़क निर्माण का विकल्प भी देखा जा सकता है।

