रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम और रिश्तों की डोर को मजबूत करने का त्योहार है। लेकिन हरिद्वार में इस बार यह पर्व उन परिवारों के लिए बेहद भावुक पल लेकर आया, जिनके भाई जेल की चारदीवारी के भीतर बंद हैं। जिला कारागार में रक्षाबंधन के मौके पर बहनों को अपने बंदी भाइयों से मुलाकात की विशेष व्यवस्था की गई।
सुबह से ही जेल परिसर के बाहर बहनों की भीड़ नजर आई। हाथों में राखी और मिठाई लिए बहनें अपने भाइयों से मिलने पहुंचीं। लंबे समय बाद आमने-सामने होने का इंतजार जैसे ही खत्म हुआ, कई भाई-बहनों की आंखें नम हो गईं। किसी बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधी तो किसी ने मिठाई खिलाकर पुराने दिनों की यादें साझा कीं।
जेल की सलाखें भले ही इन भाई-बहनों के बीच दूरी का कारण बनी हों, लेकिन रक्षाबंधन के दिन प्रेम और भावनाओं की डोर इन दीवारों से कहीं ज्यादा मजबूत दिखाई दी। मुलाकात के दौरान कई बहनें भावुक नजर आईं। भाइयों ने भी बहनों को भरोसा दिलाया कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, रिश्तों की यह डोर हमेशा कायम रहेगी।
रक्षाबंधन को देखते हुए जिला कारागार प्रशासन की ओर से विशेष मुलाकात की व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के बीच बहनों को अपने भाइयों से मिलने का मौका दिया गया। लंबे समय बाद मिले भाई-बहनों के लिए यह मुलाकात महज कुछ मिनटों की नहीं, बल्कि भावनाओं से भरा ऐसा पल रही जिसे वे लंबे समय तक याद रखेंगे।
इस दौरान जेल परिसर का माहौल भी सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग नजर आया। जहां आमतौर पर जेल की सख्ती और सुरक्षा दिखाई देती है, वहीं रक्षाबंधन पर यहां भाई-बहन के प्रेम और अपनापन देखने को मिला।
एक तरफ देशभर में घर-घर रक्षाबंधन की खुशियां मनाई गईं, वहीं हरिद्वार की जेल में भी रिश्तों की वही गर्माहट देखने को मिली। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां राखी की डोर के एक तरफ बहन थी और दूसरी तरफ जेल की सलाखों के पीछे उसका भाई।

