उत्तराखंड में दीपावली के पावन पर्व पर चारधामों में भी उत्सव और उल्लास का माहौल देखने को मिल रहा है। चारधाम यात्रा के समापन की घड़ियां नजदीक आने के साथ ही उत्तरकाशी स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में शीतकालीन कपाट बंद करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। दीपावली के खास अवसर पर मां गंगा और मां यमुना के मंदिरों को रंग-बिरंगे फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। फूलों से सजे दोनों धामों की सुंदरता श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।
गंगोत्री धाम में करीब पांच कुंतल और यमुनोत्री धाम में तीन कुंतल रंग-बिरंगे फूलों से मंदिरों को सजाया गया है। मंदिर परिसर में फूलों की आकर्षक सजावट के साथ दीपावली का उल्लास भी देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु मां गंगा और मां यमुना के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। वहीं, अब दोनों धामों में शीतकाल के लिए मां गंगा और मां यमुना की विदाई की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
गंगोत्री धाम के कपाट आगामी 10 नवंबर को अन्नकूट पर्व पर विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मुखबा गांव के लिए रवाना होगी। मुखबा में स्थित मां गंगा के शीतकालीन मंदिर में अगले छह महीनों तक श्रद्धालु पूजा-अर्चना और दर्शन कर सकेंगे। गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल के अनुसार कपाट बंद होने से पहले मंदिर को करीब पांच कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है।
वहीं, यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर को भैयादूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद होंगे। इससे पहले मंदिर को करीब तीन कुंतल रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। यमुनोत्री मंदिर समिति की ओर से कपाट बंद करने की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की उत्सव डोली पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ खरसाली गांव पहुंचेगी। यहां स्थित मां यमुना के शीतकालीन मंदिर में श्रद्धालु पूरे शीतकाल के दौरान दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल ने बताया कि दीपावली और भैयादूज पर्व को देखते हुए मंदिर को फूलों से सजाया गया है और कपाट बंद करने के कार्यक्रम की तैयारियां जारी हैं।
कुल मिलाकर दीपावली के अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की भव्य फूलों की सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अब कपाट बंद होने के साथ ही चारधाम यात्रा का यह चरण संपन्न हो जाएगा और मां गंगा व मां यमुना के दर्शन श्रद्धालु अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों पर कर सकेंगे।

