भुवन चंद्र खंडूड़ी
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन से पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे 91 वर्षीय खंडूड़ी ने मंगलवार को अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद राज्य सरकार ने 19 मई से 21 मई तक तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और सरकारी स्तर पर किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक एवं मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 20 मई को भुवन चंद्र खंडूड़ी का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। अंतिम संस्कार वाले दिन राज्य सरकार के सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और अंतिम यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
भुवन चंद्र खंडूड़ी उत्तराखंड की राजनीति में ईमानदारी, सादगी और अनुशासन की पहचान माने जाते थे। भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद तक पहुंचने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और जल्द ही भाजपा नेतृत्व का भरोसा जीत लिया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उन्हें अपने सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिनते थे।
वर्ष 1999 में अटल सरकार में सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए उन्होंने देश में आधुनिक सड़क नेटवर्क को नई दिशा दी। स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को गति देने में उनकी अहम भूमिका रही। उन्हें आधुनिक सड़क संरचना का वास्तुकार भी कहा जाता है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने पारदर्शिता, सुशासन और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को प्राथमिकता दी। “खंडूड़ी है जरूरी” का नारा उनके कार्यकाल में प्रदेशभर में गूंजा था। उन्होंने सख्त लोकायुक्त कानून, प्रशासनिक सुधार और समयबद्ध सरकारी सेवाओं को लेकर कई अहम फैसले लिए।
उनके निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्यपाल गुरमीत सिंह, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी सहित कई नेताओं और संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनकी बेटी ऋतु खंडूड़ी ने भावुक संदेश में कहा कि उन्होंने केवल अपने पिता ही नहीं, बल्कि अपने जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक को खो दिया है।

