देहरादून में सड़क हादसों का बढ़ता आंकड़ा अब पैदल राहगीरों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राजधानी की सड़कों पर कहीं फुटपाथ अतिक्रमण की चपेट में हैं तो कहीं पैदल चलने के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं है। ऐसे में राहगीरों को मजबूरी में मुख्य सड़क के किनारे चलना पड़ता है और तेज रफ्तार वाहनों के बीच उनका सफर जोखिम भरा बन जाता है।
देहरादून पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक शहर में 286 सड़क हादसे सामने आए। इन हादसों में 114 लोगों की मौत हुई, जिनमें 42 पैदल राहगीर शामिल हैं। यानी सड़क हादसों में जान गंवाने वालों का एक बड़ा हिस्सा पैदल चलने वाले लोगों का है।
अगर पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में 265 सड़क हादसों में 123 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 43 पैदल राहगीर शामिल थे। आंकड़े बताते हैं कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा आज भी देहरादून के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
शहर की प्रमुख सड़कों पर बनाए गए फुटपाथ कई जगह दुकानों के सामान, वाहनों की पार्किंग और दूसरे अतिक्रमण की वजह से पैदल यात्रियों के लिए इस्तेमाल लायक नहीं रह गए हैं। वहीं कई इलाकों में फुटपाथ की सुविधा ही नहीं है। नतीजा यह कि लोगों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ते जरूरी हैं तो फिर फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त क्यों नहीं रखा जा पा रहा है? सिर्फ फुटपाथ बना देना काफी नहीं, बल्कि वहां सुरक्षित क्रॉसिंग, बेहतर डिजाइन और ट्रैफिक व्यवस्था भी जरूरी है।
एसएसपी देहरादून प्रमेन्द्र डोबाल के मुताबिक फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के लिए संबंधित विभागों के साथ जल्द अभियान चलाया जाएगा। पुलिस का प्रयास रहेगा कि पैदल राहगीरों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराया जा सके।
देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने की योजनाओं के बीच अब जरूरत इस बात की है कि सड़क पर चलने वाले वाहनों के साथ पैदल चलने वाले इंसान की सुरक्षा को भी बराबर प्राथमिकता मिले। क्योंकि सवाल सिर्फ फुटपाथ का नहीं है—सवाल राजधानी की सड़कों पर हर दिन चल रहे हजारों लोगों की जिंदगी का है।

