उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान के तहत जारी किए जा रहे नोटिसों को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि जिन लोगों के दस्तावेज प्राकृतिक आपदाओं में नष्ट हो गए हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों में निर्वाचन विभाग पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करेगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हर साल कई इलाकों में भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाएं होती हैं। इन आपदाओं की वजह से कई लोगों के घरों के साथ-साथ उनके जरूरी दस्तावेज भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में संबंधित क्षेत्र के बीएलओ और ईआरओ की मदद से मामलों की जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी पात्र नागरिक को परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि एसआईआर अभियान के तहत केवल आम नागरिकों को ही नहीं, बल्कि उन्हें भी नोटिस मिला है। दरअसल, नाम और पते से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी तरह के भ्रम में न पड़ें और संबंधित दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष प्रस्तुत करें।
निर्वाचन आयोग ने बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और दिव्यांग मतदाताओं के घर जाकर ही नोटिसों की जांच और सुनवाई की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक 24 लाख 30 हजार मतदाताओं में से 20 लाख 27 हजार लोगों तक नोटिस पहुंचाए जा चुके हैं। वहीं, फार्म-6 के तहत 57 हजार, फार्म-7 के तहत 22 हजार 668 और फार्म-8 के तहत 26 हजार 145 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
निर्वाचन आयोग का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर न रह जाए।

