नई दिल्ली। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लोरिश स्टे अग्निकांड मामले में गिरफ्तार उत्तराखंड के शेफ केसर सिंह नेगी को अदालत से बड़ी राहत मिली है। एडिशनल सेशन जज समर विशाल की अदालत ने उन्हें जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि केवल रसोई के उपकरण चलाना अपने आप में आपराधिक लापरवाही का प्रमाण नहीं माना जा सकता। कोर्ट के इस फैसले के बाद नेगी के परिवार और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
गौरतलब है कि 3 जून को मालवीय नगर स्थित होटल फ्लोरिश स्टे में भीषण आग लगने से होटल में ठहरे 23 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे के बाद पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज के साथ होटल में कार्यरत शेफ केसर सिंह नेगी को भी गिरफ्तार कर लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और उनकी पहली जमानत याचिका भी खारिज हो गई थी।
हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी वेतनभोगी कर्मचारी की जिम्मेदारी और होटल संचालक की जिम्मेदारी में स्पष्ट अंतर है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि भवन की संरचना, फायर सेफ्टी मानकों का पालन, एलपीजी सिस्टम की सुरक्षा, आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करना होटल मालिक और प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है, न कि केवल रसोई में काम करने वाले एक कुक की।
अदालत ने यह भी कहा कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी जांच जारी रहेगी, लेकिन केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने केसर सिंह नेगी को जमानत प्रदान कर दी।
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। समर्थकों ने कहा कि शुरुआत से ही उनका मानना था कि एक शेफ को पूरे हादसे का जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। वहीं, मृतकों के परिजनों को अब भी जांच पूरी होने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का इंतजार है।

