आरुषि निशंक
देहरादून। उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अभिनेत्री, निर्माता और समाजसेवी आरुषि निशंक ने ‘प्लास्टिक से पुण्य’ अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण को आस्था और आध्यात्मिकता से जोड़ते हुए एक जनआंदोलन का रूप लेने की ओर अग्रसर है।
कार्यक्रम के दौरान आरुषि निशंक ने कहा कि यह पहल केवल सफाई अभियान नहीं, बल्कि लोगों की सोच में बदलाव लाने का प्रयास है। उनका कहना था कि प्रकृति और तीर्थों की सेवा ही सच्चा धर्म और पुण्य है। विशेष रूप से चारधाम यात्रा—केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—के संदर्भ में यह अभियान यह संदेश देता है कि श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि सेवा और जिम्मेदारी के माध्यम से भी पुण्य कमा सकते हैं।
उन्होंने इस अभियान को नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की भावना से प्रेरित बताया और कहा कि यह पहल स्वच्छता को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ती है। साथ ही www.plasticsepunya.com वेबसाइट का भी लॉन्च किया गया, जिसके माध्यम से युवाओं को इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
अभियान के दूसरे चरण में इसे और व्यापक बनाने की योजना है। यात्रा मार्गों और प्रमुख स्थलों पर “प्लास्टिक कलेक्शन एंड रिटर्न बूथ” स्थापित किए जाएंगे, जहां प्लास्टिक जमा करने पर लोगों को “पुण्य पॉइंट्स” दिए जाएंगे। इसके अलावा, QR आधारित डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए एकत्रित प्लास्टिक का रिकॉर्ड रखा जाएगा और सक्रिय प्रतिभागियों को डिजिटल प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जाएंगे। एकत्रित प्लास्टिक को रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग के माध्यम से उपयोगी उत्पादों में बदला जाएगा, जिससे पर्यावरण के साथ-साथ स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
आरुषि निशंक पिछले एक दशक से ‘स्पर्श गंगा अभियान’ के माध्यम से गंगा स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता के लिए काम कर रही हैं। उन्हें “रिवर लेडी” के रूप में भी पहचान मिली है। ‘सेल्फी विद माई स्पर्श ट्री’ अभियान के तहत लाखों पेड़ लगाए जा चुके हैं और कई शैक्षणिक संस्थानों को इससे जोड़ा गया है। उनके प्रयासों को भारत सरकार द्वारा “गंगा हीरोज” के रूप में भी मान्यता मिल चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी सक्रियता रही है, जहां उन्होंने United Nations के साथ मिलकर पर्यावरण और सतत विकास के मुद्दों को उठाया है। इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. आर.के. जैन, पद्मश्री कल्याण सिंह रावत (मैती आंदोलन के प्रणेता) और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

