गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने पौड़ी गढ़वाल के लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र के बाडियूं गांव पहुंचकर 1962 के भारत-चीन युद्ध के अमर बलिदानी बाबा जसवंत सिंह रावत की जन्मस्थली पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सांसद ने उनके पैतृक घर को आधुनिक संग्रहालय में बदलने की घोषणा की।
बताया गया कि बाबा जसवंत सिंह रावत का पैतृक आवास वर्तमान में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। सांसद बलूनी ने कहा कि इस ऐतिहासिक भवन का पुनरुद्धार कर इसे संग्रहालय का स्वरूप दिया जाएगा। यहां बाबा जसवंत सिंह के जीवन, सैन्य सेवा और देश के लिए दिए गए बलिदान से जुड़ी स्मृतियों और सामग्री को संजोने की योजना है।
बलूनी ने कहा कि संग्रहालय के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को बाबा जसवंत सिंह के साहस और देशभक्ति से प्रेरणा मिलेगी। उनका कहना है कि यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और उनकी जन्मस्थली को एक महत्वपूर्ण प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
अपनी यात्रा के दौरान सांसद ने गांव के लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं से भी बातचीत की। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि प्रवास कर स्थानीय लोगों से सीधे संवाद भी किया।
बाबा जसवंत सिंह रावत भारतीय सेना की 4 गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए थे। 1962 के युद्ध के दौरान अरुणाचल प्रदेश के नूरानांग क्षेत्र में उनके शौर्य की कहानी भारतीय सैन्य इतिहास में विशेष रूप से याद की जाती है। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
अब उनके पैतृक घर को संग्रहालय में बदलने की घोषणा के बाद बाडियूं गांव में स्थित उनकी जन्मस्थली को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके जीवन और बलिदान की कहानी को करीब से जानने का माध्यम बनेगा।

