ऋषिकेश की पहचान माने जाने वाले ऐतिहासिक राम झूला पुल को मरम्मत कार्य के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग नरेंद्र नगर ने सुरक्षा कारणों से 25 जुलाई से पुल पर पैदल सहित सभी प्रकार की आवाजाही पर रोक लगा दी है। विभाग का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक मरम्मत कार्य पूरा कर पुल को दोबारा जनता के लिए खोलना है। पुल बंद होने से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
वर्ष 1985 में निर्मित 220 मीटर लंबे और 3 मीटर चौड़े इस सस्पेंशन पुल को पहले ही असुरक्षित पुलों की सूची में शामिल किया जा चुका था। शासन ने इसकी मरम्मत के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। मरम्मत के दौरान गंगा नदी के भीतर बने 20 पाइलों और पुल को संभालने वाले 440 सस्पेंडर वायर बदले जाएंगे, ताकि पुल को फिर से सुरक्षित बनाया जा सके।
राम झूला मुनि की रेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। इससे पहले 17 अगस्त 2023 से पुल पर दोपहिया वाहनों की आवाजाही भी बंद कर दी गई थी। वहीं, वर्ष 2019 में लक्ष्मण झूला बंद होने के बाद से राम झूला पर लोगों और वाहनों का दबाव लगातार बढ़ गया था, जिससे इसकी संरचना पर अतिरिक्त भार पड़ा।
सावन और कांवड़ यात्रा शुरू होने से ठीक पहले पुल बंद होने का असर स्थानीय बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक पुल बंद देखकर वापस लौट रहे हैं, जिससे होटल, रेस्टोरेंट, दुकानों और रेहड़ी-पटरी कारोबारियों की आय प्रभावित हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि सावन के दौरान सबसे अधिक कारोबार होता है, लेकिन इस बार बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि मरम्मत जरूरी है, लेकिन इसके साथ वैकल्पिक आवागमन की बेहतर व्यवस्था और स्पष्ट सूचना प्रणाली भी बनाई जानी चाहिए थी, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय कारोबारियों को कम से कम परेशानी होती।
अब सभी की नजर लोक निर्माण विभाग के मरम्मत कार्य पर है। यदि काम तय समय पर पूरा होता है तो दिसंबर के अंत तक राम झूला फिर से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।

