छात्रों के मुद्दे पर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च कर विरोध प्रदर्शन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि छात्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं, लेकिन सरकार न तो जिम्मेदारी स्वीकार कर रही है और न ही संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने को तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है और इसके लिए सरकार को जवाब देना चाहिए।
विरोध मार्च में केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा सहित कांग्रेस के कई सांसद और नेता भी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग दोहराई।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि विपक्ष लगातार सदन में छात्रों के मुद्दे पर चर्चा चाहता है, लेकिन उसे बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की मांगों को सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया। कांग्रेस ने मांग की कि छात्रों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाए और शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।
इस दौरान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पुलिस ने हिरासत में लिया। हिरासत के बाद उन्होंने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने भी कहा कि विपक्ष अपनी बात रखने के लिए प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचा है क्योंकि संसद में पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा।
इधर कांग्रेस ने अपनी लीगल टीम को निर्देश दिया है कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार, हिरासत में लिए गए या घायल छात्रों को हरसंभव कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए। वहीं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। अब इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और सभी की नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

