देहरादून। उत्तराखंड में ग्राम पंचायत स्तर पर लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। राज्य में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित सैकड़ों सीटों को अब सामान्य श्रेणी में बदले जाने की तैयारी है।
पंचायतीराज निदेशालय ने शासन को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें बताया गया है कि दो बार चुनाव होने के बावजूद ग्राम पंचायत सदस्यों के 3846 पद अब भी खाली हैं। इनमें से अधिकांश सीटों पर किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन नहीं किया, जिसके चलते ये पद रिक्त रह गए।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष जुलाई में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अधिकांश पदों पर प्रतिनिधि चुने गए, लेकिन ग्राम पंचायत सदस्य के हजारों पद खाली रह गए। इसके बाद उपचुनाव भी कराए गए, फिर भी बड़ी संख्या में सीटें नहीं भर सकीं।
अब इन पदों को सामान्य श्रेणी में परिवर्तित कर तीसरी बार चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है, ताकि पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें। हालांकि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को यथावत रखा जाएगा।
इस बीच एक और चिंताजनक स्थिति सामने आई है, जहां 33 ग्राम प्रधान ऐसे हैं, जो चुनाव जीतने के बावजूद अब तक शपथ नहीं ले पाए हैं। इसका कारण ग्राम पंचायत सदस्यों का कोरम पूरा न होना बताया जा रहा है, जिससे पंचायतों का गठन ही नहीं हो पा रहा है।

प्रदेश में कुल 7817 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से कई अभी भी अधूरी स्थिति में हैं। अधिकारियों का मानना है कि सीटों को सामान्य किए जाने से चुनाव प्रक्रिया में तेजी आएगी और स्थानीय प्रशासन मजबूत होगा।
