केदारनाथ यात्रा
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम में इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। 22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से 4 मई तक 3.35 लाख से अधिक भक्त दर्शन कर चुके हैं। जहां एक ओर आस्था का यह जनसैलाब नया रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण पर इसका गंभीर असर भी सामने आने लगा है।
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर बढ़ता प्लास्टिक कचरा अब बड़ी चिंता का विषय बन गया है। पिछले दो हफ्तों में करीब 7 टन प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया है, जबकि प्रतिदिन 5 से 6 डंपर गीला कचरा रुद्रप्रयाग के डंपिंग जोन तक पहुंचाया जा रहा है। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि यात्रा के साथ-साथ कचरा प्रबंधन भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह कचरा मंदाकिनी नदी तक पहुंच रहा है, जिससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। यात्रा मार्ग और पड़ावों पर जगह-जगह प्लास्टिक फैला नजर आता है, और कई बार इसे सीधे नदी में फेंक दिया जाता है, जो पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदेह है।
इस समस्या से निपटने के लिए सुलभ इंटरनेशनल के 400 से अधिक सफाई कर्मी सीतापुर से केदारनाथ तक लगातार सफाई अभियान में जुटे हुए हैं। सोनप्रयाग में प्लास्टिक कचरे को कॉम्पैक्ट करने के लिए विशेष मशीनें लगाई गई हैं, जहां एकत्र कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा रहा है।
हालांकि, प्रशासन और सफाई कर्मियों के प्रयासों के बावजूद कुछ स्थानीय व्यापारियों और असामाजिक तत्वों की लापरवाही स्थिति को बिगाड़ रही है। दुकानों और ढाबों में प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग और कचरे का सही निस्तारण न होना समस्या को और बढ़ा रहा है।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि मंदाकिनी नदी को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे कचरा निर्धारित स्थानों पर ही डालें। स्पष्ट है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आस्था का यह महापर्व पर्यावरणीय संकट में बदल सकता है। अब जरूरत है प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ जनजागरूकता और सहभागिता की, ताकि प्रकृति और आस्था के बीच संतुलन बना रहे।

