उत्तराखंड में आज लोकपर्व हरेला पूरे उत्साह, उल्लास और प्रकृति संरक्षण के संकल्प के साथ मनाया जा रहा है। प्रदेशभर में पौधारोपण, लोक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। हरियाली और प्रकृति को समर्पित इस पर्व पर सरकार, सामाजिक संगठन, स्कूल, स्वयंसेवी संस्थाएं और राजनीतिक दल भी बड़े स्तर पर पौधे लगाकर पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहे हैं।
हरेला के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने भी राज्यव्यापी पौधारोपण अभियान की शुरुआत की है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत अगले एक महीने में प्रदेशभर में छह लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान आज से शुरू होकर 15 अगस्त तक चलेगा। पार्टी का कहना है कि केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करना भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
भाजपा संगठन के अनुसार प्रदेश के सभी 11,729 बूथों पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक बूथ पर कम से कम 50 पौधे लगाए जाएंगे। इस अभियान में मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, मेयर, ब्लॉक प्रमुख, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। हर लगाए गए पौधे की देखरेख के लिए जिम्मेदार कार्यकर्ताओं को भी नामित किया जाएगा, ताकि पौधारोपण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम बनकर न रह जाए।
प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने बताया कि अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है। इसके लिए जिला और मंडल स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया गया है, जो पूरे अभियान की निगरानी करेंगी। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी सभी कार्यकर्ताओं और प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उन्हें संरक्षित रखने की अपील की है।
वहीं, देहरादून नगर निगम ने भी हरेला के अवसर पर ‘हरित क्रांति अभियान’ की शुरुआत की है। नगर निगम ने इस वर्ष 70 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। अभियान के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के माध्यम से घर-घर सब्जियों और फलदार पौधों का वितरण भी किया जा रहा है। मेयर सौरभ थपलियाल और नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे ने पौधों का वितरण कर अभियान का शुभारंभ किया।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी हरेला उत्साहपूर्वक मनाया गया। हरिद्वार के प्रेम निवास आश्रम में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, अल्मोड़ा और अन्य जिलों में भी लोकगीतों, मांगल गीतों और पौधारोपण कार्यक्रमों के साथ लोगों ने प्रकृति के प्रति अपनी आस्था और जिम्मेदारी व्यक्त की।
हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। बदलते जलवायु संकट और बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच यह पर्व हर व्यक्ति को यह संदेश देता है कि यदि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हराभरा भविष्य चाहिए, तो केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उन्हें बचाना भी उतना ही जरूरी है।

