कहते हैं कि प्यार न सरहद देखता है, न भाषा और न ही संस्कृति। जब दो दिल मिलते हैं, तो दूरियां भी रिश्तों के आगे छोटी पड़ जाती हैं। इसकी एक खूबसूरत मिसाल उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में देखने को मिली है, जहां एक पहाड़ी युवक और थाईलैंड की युवती ने कुमाऊंनी रीति-रिवाजों के साथ शादी कर अपने रिश्ते को नया नाम दिया। यह प्रेम कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है।
बागेश्वर जिले के उडल गांव निवासी नवीन परिहार और थाईलैंड की रहने वाली 27 वर्षीय मोरिया ने विजयादशमी के शुभ अवसर पर सात फेरे लिए। दोनों की मुलाकात दुबई में करीब दो साल पहले हुई थी। खास बात यह है कि दोनों ही पेशे से शेफ हैं और दुबई में साथ काम करते हुए एक-दूसरे के करीब आए। शुरुआत में पेशेवर मुलाकात दोस्ती में बदली और धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई। आखिरकार दोनों ने जीवनभर साथ निभाने का फैसला कर लिया।
नवीन परिहार के पिता पूरन सिंह परिहार बीएसएफ से सेवानिवृत्त सैनिक हैं। इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई गांव के पास जीआईसी रवाईंखाल से करने के बाद नवीन ने हल्द्वानी से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया। इसके बाद रोजगार की तलाश में दुबई चले गए, जहां वह पिछले करीब 11 वर्षों से काम कर रहे हैं।
दोनों परिवारों की सहमति से विवाह हल्द्वानी में आयोजित किया गया। पहले देवलचौड़ में नवीन की बहन के आवास पर पारिवारिक रस्में निभाई गईं। इसके बाद हल्द्वानी के शीतला देवी मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न हुआ।
मोरिया के लिए कुमाऊंनी रीति-रिवाज नए थे, लेकिन उन्होंने हर रस्म को सीखने और समझने में खास दिलचस्पी दिखाई। उन्हें परंपराओं का अर्थ समझाने के लिए अंग्रेजी अनुवादक की मदद ली गई। इस खास मौके पर मोरिया के पिता, भाई और भाभी भी थाईलैंड से हल्द्वानी पहुंचे। उन्होंने भी भारतीय और कुमाऊंनी परंपराओं में उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
नवीन के परिवार ने इस रिश्ते पर खुशी जताई है। अब पैतृक गांव उडल में मोरिया के स्वागत की तैयारियां चल रही हैं, जहां उन्हें पहाड़ की संस्कृति, लोक परंपराओं और खूबसूरत जीवनशैली से रूबरू कराया जाएगा।

