मनसा राम बिल्डिंग
देहरादून में कथित लैंड माफिया, नगर निगम और विकास प्राधिकरण के बीच मिलीभगत से जुड़ा मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है। इस मामले में Supreme Court of India ने अहम सुनवाई करते हुए फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, जिससे राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई पर तत्काल ब्रेक लग गया है।
“साकेत भाम्बरी बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य” शीर्षक से दायर इस याचिका पर 21 अप्रैल 2026 को सुनवाई हुई। Justice Vikram Nath और Justice Sandeep Mehta की खंडपीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए स्टेटस क्वो लागू करने का निर्देश दिया। अदालत के इस आदेश का मतलब है कि संबंधित संपत्तियों पर फिलहाल किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकती।
दस्तावेजों के अनुसार, याचिका 19 अप्रैल 2026 को दायर की गई थी और अगले ही दिन इसे एसएलपी (सिविल) 14194/2026 के रूप में पंजीकृत किया गया। इस याचिका में Government of Uttarakhand के साथ-साथ Dehradun Municipal Corporation, Mussoorie Dehradun Development Authority, CSIR-CBRI और अन्य संबंधित पक्षों को शामिल किया गया है।
मामले का केंद्र बिंदु देहरादून में कथित तौर पर जमीनों पर कब्जा, फर्जी ट्रांसफर और अवैध निर्माण से जुड़ी शिकायतें हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि विकास प्राधिकरण और अन्य एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध रही है, जिससे कई लोगों की संपत्तियों पर खतरा पैदा हुआ।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर तुरंत देहरादून में देखने को मिला। एक विवादित संपत्ति “मनसा राम बांकर” भवन पर चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई को तत्काल रोक दिया गया। यह कार्रवाई पहले प्रशासन द्वारा जारी आदेश के तहत चल रही थी, लेकिन अब अदालत के निर्देश के बाद इसे रोकना पड़ा।
अधिवक्ता शिव भट्ट ने इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव, नगर निगम, एमडीडीए, डीजीपी और स्थानीय पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि स्टेटस क्वो आदेश भवन के बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर, मेजेनाइन फ्लोर सहित सभी हिस्सों पर लागू होगा।

साथ ही प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि अदालत के आदेश के बावजूद किसी प्रकार की तोड़फोड़ या निर्माण गतिविधि जारी रहती है, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा, जिसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। फिलहाल, इस आदेश के बाद देहरादून में कई विवादित संपत्तियों पर चल रही कार्रवाइयों पर विराम लग गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई में अदालत के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि राज्य में जमीन से जुड़े विवादों पर आगे क्या दिशा तय होगी।
