उत्तराखंड: केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा 2026 का भव्य शुभारंभ हो गया है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है…जिसमें उन्होंने यात्रा को केवल आस्था नहीं बल्कि जिम्मेदारी और संस्कृति से जोड़ते हुए पांच संकल्पों का पालन करने की अपील की है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की चारधाम यात्रा भारत की सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। हर वर्ष देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस यात्रा के माध्यम से एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में उत्तराखंड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और राज्य आज पर्यटन, आध्यात्मिकता और विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने यात्रियों से आग्रह करते हुए पांच संकल्पों को अपनाने की अपील की
पहला संकल्प: यात्रा के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, नदियों और धामों को साफ रखें और सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करें।
दूसरा संकल्प: हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी का सम्मान करें और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं, जैसे “एक पेड़ मां के नाम” जैसे प्रयासों में भागीदारी करें।
तीसरा संकल्प: सेवा भाव को अपनाएं, सहयात्रियों की मदद करें और देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों के साथ संवाद कर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करें।
चौथा संकल्प: अपने कुल खर्च का कम से कम 5 प्रतिशत स्थानीय उत्पादों की खरीद पर खर्च करें, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका को बल मिले।
पांचवां संकल्प: यात्रा के सभी नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करें और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुगम बनी रहे।
प्रधानमंत्री ने यह भी अपील की कि श्रद्धालु यात्रा के दौरान प्रकृति के साथ जुड़ें और डिजिटल माध्यमों से कुछ दूरी बनाकर इस आध्यात्मिक अनुभव को पूरी तरह महसूस करें।
यह संदेश न केवल श्रद्धालुओं के लिए दिशा-निर्देश है, बल्कि चारधाम यात्रा को स्वच्छ, सुरक्षित और जिम्मेदार बनाने की एक व्यापक पहल भी माना जा रहा है।

