देहरादून : देहरादून में आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 210 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण किया और विकसित भारत के लिए “प्रगति, प्रकृति और संस्कृति” की त्रिवेणी को जरूरी बताया।
कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री ने डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना की और फिर 12 किलोमीटर लंबे रोड शो में शामिल हुए। इसके बाद गढ़ी कैंट स्थित सभा में उन्होंने देशवासियों को बैसाखी और बिहू की शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कॉरिडोर उत्तराखंड की विकास यात्रा को नई गति देगा और चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी सफर आसान बनाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है और यह दशक राज्य के नाम होता दिखाई दे रहा है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि देते हुए सामाजिक न्याय और समावेशी विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में बड़े फैसलों के जरिए संविधान की भावना को मजबूत किया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सड़कें देश की “भाग्य रेखा” बन रही हैं। बीते वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े स्तर पर निवेश हुआ है और उत्तराखंड में भी कई बड़ी परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। चारधाम सड़क, रेल और रोपवे परियोजनाएं राज्य के भविष्य को नई दिशा दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि नए भारत में स्पीड और स्केल पर काम हो रहा है। दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर से जहां समय और ईंधन की बचत होगी, वहीं किसानों और व्यापारियों को भी फायदा मिलेगा। इससे पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में बढ़ते पर्यटन का जिक्र करते हुए कहा कि अब राज्य बारामासी पर्यटन की ओर बढ़ रहा है। विंटर टूरिज्म और धार्मिक स्थलों पर बढ़ती संख्या इसका प्रमाण है।
उन्होंने विकास के साथ पर्यावरण संतुलन पर भी जोर दिया और कहा कि निर्माण कार्यों में प्रकृति का ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही लोगों से अपील की कि देवभूमि की स्वच्छता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में बड़ा अधिकार मिलने जा रहा है, जिसे जल्द लागू किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा को भी नमन किया और पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक, वन पेंशन जैसी योजनाओं का जिक्र किया।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का संदेश साफ था—देश के विकास के लिए प्रगति, प्रकृति और संस्कृति को साथ लेकर चलना ही विकसित भारत की असली पहचान होगी।
