कर्णप्रयाग मारपीट मामले में जेल में बंद चारों निहंगों को बड़ी राहत मिली है। गोपेश्वर स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय ने शनिवार को चारों आरोपियों की जमानत मंजूर कर दी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमानत मिलने के बावजूद मामले की सुनवाई जारी रहेगी और कानूनी प्रक्रिया अपने तय नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी।
गौरतलब है कि 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। घटना के बाद पुलिस ने हमला करने वाले निहंगों के खिलाफ जान से मारने के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के भ्रामक और विवादित पोस्ट वायरल हुए, जिससे प्रदेश में तनाव का माहौल बन गया। हालात को देखते हुए प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए था।
इसी बीच शुक्रवार को उत्तराखंड प्रशासन और निहंग सिख समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने शांति बनाए रखने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने पर सहमति जताई।
बैठक में निहंग प्रतिनिधियों ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें दर्ज मुकदमे वापस लेने, गिरफ्तार निहंगों की रिहाई, प्रतिनिधिमंडल को साथियों से मिलने की अनुमति और अन्य संबंधित मांगें शामिल थीं। प्रशासन ने इन मांगों पर विचार करने के लिए दो दिन का समय मांगा और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया।
निहंग प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और प्रेम का संदेश देना है। उनका कहना था कि कर्णप्रयाग की घटना में दोनों पक्षों से गलतियां हुई हैं और इसका समाधान आपसी संवाद और सहमति से निकाला जाना चाहिए।
अब चारों निहंगों को न्यायालय से जमानत मिलने के बाद इस पूरे विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। फिलहाल कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी, जबकि प्रशासन और निहंग समुदाय के बीच संवाद के जरिए स्थायी समाधान की कोशिशें भी आगे बढ़ेंगी। पूरे मामले पर प्रदेशभर की नजर बनी हुई है।

