उक्रांद
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। भाजपा और कांग्रेस के बीच होने वाले संभावित मुकाबले के बीच अब क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल यानी उक्रांद भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी में जुट गया है। राज्य आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाला उक्रांद आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रहा है। इसके साथ ही पार्टी समान विचारधारा वाले क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर लाने की संभावनाओं पर भी मंथन कर रही है।
उक्रांद की रणनीति को लेकर 25 अक्टूबर को हल्द्वानी में एक बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में क्षेत्रीय दलों के साथ संभावित गठबंधन और चुनावी रणनीति पर चर्चा की जा सकती है। पार्टी का उद्देश्य उत्तराखंड के स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना है।
उक्रांद के संरक्षक और पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी के मुताबिक, पार्टी की ओर से कुमाऊं मंडल में उत्तराखंड उत्थान जात्रा शुरू कर दी गई है। कुमाऊं के बाद इसे गढ़वाल मंडल में भी आयोजित किया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से लोगों को जागरूक करने और स्थानीय मुद्दों को लेकर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की जाएगी।
अगर पार्टी के पिछले चुनावी प्रदर्शन पर नजर डालें तो वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में उक्रांद ने चार सीटों पर जीत हासिल की थी। 2007 में पार्टी को तीन सीटें मिलीं, जबकि 2012 में यह संख्या घटकर केवल एक रह गई। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई। ऐसे में 2027 का चुनाव उक्रांद के लिए अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस हासिल करने की बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
पार्टी का फोकस पिथौरागढ़, जागेश्वर, द्वाराहाट, भीमताल, सल्ट, खटीमा, नरेंद्रनगर और कर्णप्रयाग जैसी विधानसभा सीटों पर बताया जा रहा है। इन क्षेत्रों में संभावित प्रत्याशियों को लेकर भी पार्टी सक्रिय है। उक्रांद के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, चुनाव में मूल निवास और सशक्त भू-कानून जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। अब देखना होगा कि सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा करने वाला उक्रांद जनता के बीच कितना समर्थन जुटा पाता है और क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन की उसकी रणनीति कितनी सफल होती है।

