हेमकुंड
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को साल की अंतिम अरदास के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए करीब चार हजार श्रद्धालु धाम में मौजूद रहे। इस वर्ष हेमकुंड साहिब में रिकॉर्ड 3 लाख 84 हजार 573 से अधिक श्रद्धालुओं ने मत्था टेका।
बर्फबारी के बीच कपाट बंद होने का नजारा बेहद मनमोहक रहा। शुक्रवार को हुई भारी बर्फबारी के बाद पूरा धाम सफेद चादर में ढक गया। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और लोग बर्फीले रास्तों से होकर अंतिम अरदास में शामिल होने पहुंचे।
शनिवार सुबह दस बजे सुखमनी साहिब के पाठ के साथ कपाट बंद करने की धार्मिक प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद गुरुद्वारे में शब्द कीर्तन किया गया। दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर साल की अंतिम अरदास हुई और एक बजे हुक्मनामा लिया गया। इसके बाद सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच पंज प्यारों की अगुवाई में गुरु ग्रंथ साहिब को दरबार साहिब से सचखंड में सुशोभित किया गया। इसी के साथ हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
इस खास अवसर पर पाकिस्तान से आए 40 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं के जत्थे ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह जत्था गोविंदघाट पहुंचने के बाद घांघरिया होते हुए हेमकुंड साहिब पहुंचा और अंतिम दिन के धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हुआ। गुरुद्वारा प्रबंधक सेवा सिंह के अनुसार, श्रद्धालुओं ने कपाट बंद होने के ऐतिहासिक क्षण को देखा।
हेमकुंड साहिब के साथ लोकपाल घाटी के अन्य धार्मिक स्थलों में भी शीतकालीन बंदी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लक्ष्मण मंदिर के कपाट रविवार को बंद किए जाने हैं, जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी और बर्फबारी के बीच हुई अंतिम अरदास ने हेमकुंड साहिब की यात्रा को यादगार बना दिया। अब श्रद्धालुओं को अगले यात्रा सीजन में धाम के कपाट खुलने का इंतजार रहेगा।

