उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के दयारा बुग्याल से लापता हुई रामनगर निवासी बबीता पांडे की तलाश को तीन महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक उनका कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। 29 मई 2026 को बबीता अपने कुछ साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई थीं। इसके बाद गोई क्षेत्र से उनके अचानक लापता होने की सूचना सामने आई थी। तब से परिवार लगातार उनकी वापसी का इंतजार कर रहा है।
बबीता की तलाश में पुलिस के साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की टीमों ने लंबे समय तक सर्च ऑपरेशन चलाया। दुर्गम पहाड़ी इलाकों, घने जंगलों और संभावित स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। हेलीकॉप्टर और अन्य तकनीकी साधनों की मदद से भी उन इलाकों को खंगाला गया, जहां बबीता के होने की संभावना जताई गई थी।
रेस्क्यू टीमों ने जंगल के साथ-साथ संभावित भालू आवासीय क्षेत्रों, पानी के टैंकों और अन्य संदिग्ध स्थानों की भी जांच की। कुछ जगहों पर पहले से मौजूद खुदाई के निशानों की भी दोबारा पड़ताल की गई, लेकिन बबीता का कोई स्पष्ट सुराग सामने नहीं आया। लगातार तीन महीने से अधिक समय तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद फिलहाल रेस्क्यू अभियान रोक दिया गया है और पुलिस मामले की विवेचना कर रही है।
मामले में अपहरण की आशंका को देखते हुए पुलिस ने दो युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तकनीकी जांच भी की थी। हालांकि, अब तक इस दिशा में भी कोई निर्णायक तथ्य सामने नहीं आया है। पुलिस बबीता के लापता होने से जुड़े सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।
उत्तरकाशी के एसपी कमलेश उपाध्याय के मुताबिक, पुलिस ने बबीता की तलाश में हर संभव प्रयास किए हैं। विभिन्न टीमें संभावित स्थानों पर तलाश के साथ मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही हैं। उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
बबीता पांडे नैनीताल जिले की रहने वाली हैं और MBA की पढ़ाई के बाद एक निजी कंपनी में काम कर रही थीं। अब 29 मई से लगातार उनकी तलाश जारी है, लेकिन सवाल अभी भी वही है—**आखिर दयारा बुग्याल से बबीता कहां और किन परिस्थितियों में लापता हुईं?** परिवार को उम्मीद है कि जांच से जल्द कोई ठोस सुराग सामने आएगा।

