उत्तराखंड में पहाड़ की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज आने-जाने में सुविधा देने की योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। छात्राओं को मुफ्त परिवहन सुविधा देने का प्रस्ताव पिछले साल तैयार किया गया था, लेकिन अब तक इसका लाभ छात्राओं को नहीं मिल सका है। सरकार की ओर से यह पहल छात्राओं की कॉलेज में उपस्थिति बढ़ाने और परिवहन की परेशानी दूर करने के उद्देश्य से प्रस्तावित की गई थी।
उच्च शिक्षा विभाग की योजना के मुताबिक, पहाड़ी क्षेत्रों में कई छात्राएं परिवहन सुविधा के अभाव में नियमित रूप से महाविद्यालय नहीं पहुंच पाती हैं। इसी समस्या को देखते हुए छात्राओं के परिवहन खर्च को सरकार की ओर से वहन करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की ओर से भी इस योजना को लेकर निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद योजना लागू नहीं हो पाई। ऐसे में छात्राओं को अब भी कॉलेज आने-जाने के लिए निजी साधनों या सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहना पड़ रहा है। खासकर दूरदराज और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली छात्राओं के लिए यह समस्या ज्यादा बड़ी है।
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश में सरकारी और निजी समेत बड़ी संख्या में महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में पांच राज्य विश्वविद्यालय, 26 निजी विश्वविद्यालय, 118 सरकारी महाविद्यालय, 244 निजी महाविद्यालय और 21 सहायता प्राप्त महाविद्यालय हैं। इसके बावजूद परिवहन सुविधा के अभाव में कई छात्राओं की नियमित उपस्थिति प्रभावित हो रही है।
सचिव उच्च शिक्षा डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के अनुसार, सरकारी महाविद्यालयों की छात्राओं को मुफ्त परिवहन सुविधा देने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। यानी योजना को लागू करने के लिए अब कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है।
वहीं, सरकार की ओर से नौवीं कक्षा की छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए मुफ्त साइकिल योजना का लाभ दिया जा रहा है। मैदानी क्षेत्रों में छात्राओं के खातों में 2850 रुपये दिए जाते हैं, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में इसी राशि की बैंक एफडी की जाती है।

