सड़क पर सुरक्षित सफर केवल वाहन की स्थिति पर ही नहीं, बल्कि चालक की छोटी-छोटी सावधानियों पर भी निर्भर करता है। इन्हीं में से एक है सही फुटवियर पहनकर वाहन चलाना। परिवहन विभाग का कहना है कि चप्पल पहनकर ड्राइविंग करना दुर्घटना का कारण बन सकता है, लेकिन उत्तराखंड में इस नियम को लेकर कार्रवाई बेहद सीमित रही है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच चप्पल पहनकर वाहन चलाने वाले केवल 19 चालकों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की गई। वहीं इसी अवधि में ट्रिपल राइडिंग के 168 चालान काटे गए। इसके विपरीत बिना हेलमेट, बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र, ओवरलोडिंग और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन के मामलों में 23 हजार 723 वाहनों पर कार्रवाई की गई, जबकि 1,384 वाहनों को सीज भी किया गया।
विशेष बात यह है कि अप्रैल से अक्टूबर 2025 तक चप्पल पहनकर ड्राइविंग करने के मामले में एक भी चालान दर्ज नहीं किया गया। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस नियम का पालन हो रहा है या फिर इसकी निगरानी प्रभावी ढंग से नहीं हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खुली या हवाई चप्पल पहनकर वाहन चलाने से पैर की पकड़ कमजोर हो जाती है। कई बार चप्पल ब्रेक या क्लच के नीचे फंस सकती है, जिससे आपात स्थिति में समय पर ब्रेक लगाना मुश्किल हो जाता है। इससे वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है और गंभीर सड़क हादसा हो सकता है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत चप्पल पहनकर कार चलाने पर धारा 177 के अंतर्गत 500 रुपये का चालान किया जा सकता है। वहीं ट्रिपल राइडिंग पर धारा 194 के तहत 1,000 रुपये का जुर्माना निर्धारित है।
एआरटीओ प्रवर्तन काशीपुर संदीप वर्मा ने बताया कि वाहन चालकों को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए अच्छी ग्रिप वाले जूते या मजबूत सैंडल पहनने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बिना हेलमेट, बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र, ओवरलोडिंग और अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल चालान ही नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। सुरक्षित ड्राइविंग की छोटी-छोटी आदतें कई बड़ी दुर्घटनाओं को टाल सकती हैं।

