उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए नई व्यवस्था लागू करते हुए मान्यता और नवीनीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट कर दिया है। राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने संस्थानों की मान्यता के लिए शुल्क निर्धारित कर दिया है। साथ ही कक्षा एक से आठवीं तक धार्मिक शिक्षा का नया पाठ्यक्रम भी तैयार कर लिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत कक्षा एक से आठवीं तक संचालित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता के लिए पांच हजार रुपये शुल्क देना होगा। वहीं कक्षा नौ से बारहवीं तक के संस्थानों के लिए यह शुल्क सात हजार पांच सौ रुपये निर्धारित किया गया है। मान्यता मिलने के बाद प्रत्येक तीन वर्ष में संस्थानों को अपना नवीनीकरण भी कराना होगा।
सरकार ने इससे पहले प्रदेश में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया था। इसके बाद सभी मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए इसी प्राधिकरण से मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया गया। हालांकि अब तक शुल्क तय नहीं होने के कारण कई संस्थानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।
मान्यता के लिए कुछ आवश्यक शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। संस्थान किसी अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और संचालित होना चाहिए तथा संबंधित परिषद से संबद्ध होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा संस्थान ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा जिससे सांप्रदायिक या सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो। शिक्षकों की नियुक्ति परिषद द्वारा निर्धारित योग्यताओं के अनुसार करनी होगी और किसी भी छात्र या कर्मचारी को धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा।
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार धार्मिक शिक्षा के लिए कक्षा एक से आठवीं तक का पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसे तीन चरणों में विभाजित किया गया है। पहला आधारभूत स्तर, जिसमें कक्षा एक और दो शामिल हैं। दूसरा प्रारंभिक स्तर, जिसमें कक्षा तीन से पांच तक के विद्यार्थी होंगे। जबकि तीसरा मध्य स्तर कक्षा छह से आठ तक के छात्रों के लिए निर्धारित किया गया है।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशासनिक जवाबदेही और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शैक्षणिक ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।
