हरिद्वार
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में गर्मी बढ़ने के साथ गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। लेकिन गंगा के तेज बहाव और लोगों की लापरवाही के कारण हादसों का सिलसिला भी थमने का नाम नहीं ले रहा। बीते एक महीने के दौरान गंगा और गंगनहर में डूबने की 10 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कई लोगों की जान चली गई।
जानकारी के अनुसार अधिकांश हादसे उस समय हुए जब लोग सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर प्रतिबंधित क्षेत्रों में स्नान करने पहुंचे या फिर रोमांच और वीडियो बनाने के चक्कर में गहरे पानी में उतर गए। कई मामलों में लोगों ने पुलों और रेलिंग को पार कर सीधे गंगा में छलांग लगा दी, जिसका परिणाम दर्दनाक हादसों के रूप में सामने आया।
सबसे अधिक घटनाएं हरिद्वार शहर कोतवाली क्षेत्र के सप्तऋषि, ज्वालापुर के जटवाड़ा पुल और बहादराबाद इलाके में दर्ज की गई हैं। हादसों की सूचना मिलने पर जल पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया। कई मामलों में शव बरामद किए गए, जबकि कुछ लोगों की तलाश लंबे समय तक जारी रही।
जल पुलिस के अनुसार कई दुर्घटनाएं अचानक पैर फिसलने या तेज बहाव की चपेट में आने के कारण हुईं। सप्तऋषि क्षेत्र में एक बुजुर्ग स्नान के दौरान बहाव में बह गए, जबकि बहादराबाद में एक फैक्टरी कर्मी गंगा में डूबकर लापता हो गया। ज्वालापुर में भी एक युवक अपनी महिला मित्र के सामने नहाते समय तेज बहाव में बह गया था।
पुलिस और प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करने की सलाह दे रहे हैं। एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह ने बताया कि गंगा घाटों पर नियमित गश्त की जा रही है और श्रद्धालुओं को चेतावनी भी दी जा रही है। बावजूद इसके लोग जोखिम उठाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
प्रशासन ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि वे रेलिंग पार न करें, प्रतिबंधित क्षेत्रों में न जाएं और तेज बहाव वाले स्थानों पर स्नान से बचें। थोड़ी सी लापरवाही जीवन भर का दर्द बन सकती है।

