उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से गिरफ्तार किए गए संदिग्ध जासूसों ने पूछताछ में बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि झारखंड के प्रसिद्ध देवघर मंदिर भी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के निशाने पर था।
जासूसों के पास से बरामद मोबाइल और दस्तावेजों से पता चला कि वे मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां पाकिस्तान भेजने की कोशिश कर रहे थे।
जासूसों का नेटवर्क और काम करने का तरीका
पकड़े गए जासूसों में बिहार के नौशाद अली मुख्य हैंडलर थे। नौशाद को पाकिस्तान में बैठे सरफराज नामक मास्टरमाइंड ने देवघर मंदिर की वीडियो और जीपीएस लोकेशन जुटाने का काम दिया था। इसके अलावा नौशाद ने दिल्ली के कैंट इलाके में भी रेकी की और वीडियो पाकिस्तान भेजे।
जासूसों ने सोशल मीडिया के एक विशेष ऐप के जरिए पाकिस्तान से संपर्क बनाए रखा। नौशाद ने मीरा नामक महिला से भी इसी नेटवर्क के माध्यम से संपर्क किया, जो अवैध हथियार तस्करी में भी शामिल थी। इसके अलावा सुहेल मलिक और समीर भी अलग-अलग इलाकों में संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटा रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया कि मीरा के फोन में 100 से ज्यादा लोकेशन के वीडियो और फोटो मिले हैं।
हवाला नेटवर्क की भी जांच
जांच एजेंसियां अब हवाला नेटवर्क को भी तोड़ने में लगी हुई हैं। पाकिस्तान में बैठे सरफराज जासूसों को पंजाब रूट के जरिए हवाला से पैसे भेजता था। पुलिस फाइनेंशियल ट्रेलिंग कर रही है और आरोपियों के बताए दुकानों, करीबियों और मनी ट्रांसफर सेंटरों की जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को लुभाकर बनाया गया था और इसमें तकनीकी रूप से सक्षम लोग शामिल थे। समय रहते कार्रवाई होने की वजह से देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा टल गया।
सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी
सरकारी एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क पर नजर रख रही हैं। संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है और संभावित खतरों से निपटने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में सतर्क रहना बेहद जरूरी है ताकि देश की सुरक्षा सुरक्षित रहे।

