
उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर कहर बनकर बरस रहा है। सोमवार सुबह से हो रही लगातार भारी बारिश के चलते प्रदेशभर में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में भारी से भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। खासकर नैनीताल, चंपावत और बागेश्वर जिलों के लिए अगले 24 घंटों को अत्यंत संवेदनशील माना गया है।
राज्य के प्रमुख चारधाम मार्गों में शामिल यमुनोत्री और गंगोत्री हाईवे पर जगह-जगह भूस्खलन और मलबा आने से मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। यमुनोत्री हाईवे पर रानाचट्टी, स्यानाचट्टी और पाली गाड़ क्षेत्र में मलबा आने से रास्ता बंद है, जबकि गंगोत्री हाईवे पर डबरानी के पास बड़े पत्थर और मलबे के कारण यातायात ठप हो गया है।
इसके अलावा राज्यभर में कुल 59 सड़कें बंद हो गई हैं, जिनमें 36 ग्रामीण मार्ग भी शामिल हैं। पिथौरागढ़ जिले में सबसे ज्यादा प्रभाव देखा जा रहा है, जहां तवाघाट-घटियाबगड़-लिपुलेख और धारचूला-तवाघाट हाईवे समेत कुल 19 सड़कें बंद हैं। जौलजीबी-मुनस्यारी मोटर मार्ग और थल-मुनस्यारी मार्ग पर भी बड़े-बड़े पत्थर गिरने से रास्ता अवरुद्ध हो गया है। देहरादून जिले में पांच, अल्मोड़ा में एक, बागेश्वर में चार, चमोली में आठ, नैनीताल में एक, पौड़ी में पांच, रुद्रप्रयाग में चार, टिहरी में एक और उत्तरकाशी में 11 सड़कें मलबे और भूस्खलन के चलते बंद पड़ी हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक रोहित थपलियाल ने चेतावनी दी है कि 5 अगस्त तक पूरे राज्य में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय इलाकों में सतर्क रहने की अपील की है। प्रशासन ने लोगों को गैर-जरूरी यात्राओं से बचने और नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और मार्ग खोलने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।