देहरादून। उत्तराखंड में दोहरी पेंशन लेने के मामलों ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। सामने आया है कि कुछ सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी अपने मूल विभाग से रिटायरमेंट पेंशन लेने के साथ-साथ समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था या विधवा पेंशन का लाभ भी ले रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
समाज कल्याण विभाग उत्तराखंड के निदेशक के निर्देश पर सभी जिलों में सत्यापन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। देहरादून के जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर कल्याण ने बताया कि शुरुआती जांच में देहरादून जिले में 126 ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां लाभार्थी रिटायरमेंट पेंशन के साथ सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी ले रहे हैं।
इनमें 93 वृद्धावस्था पेंशनधारक और 33 विधवा पेंशनधारक शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, निदेशालय से प्राप्त सूची पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है और जल्द ही मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) कार्यालय की टीम घर-घर जाकर सत्यापन करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि समाज कल्याण पेंशन के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार लाभार्थी की प्रमाणित मासिक आय ₹4000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होती है, जहां दस्तावेज़ों की जांच के बाद पेंशन स्वीकृत की जाती है।
राज्य स्तर पर समाज कल्याण विभाग ने 1377 ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सूची तैयार की है, जो सामाजिक सुरक्षा पेंशन ले रहे थे। इस संबंध में विभाग के निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बताया गया है कि सूची में शामिल 314 लोगों की पेंशन पहले ही रोकी जा चुकी है, जबकि 970 अन्य मामलों में पेंशन भुगतान रोककर जांच की जा रही है।
यह मामला तब सामने आया जब महालेखाकार (लेखा परीक्षा) ने राज्य के पेंशन रिकॉर्ड की ऑडिट जांच की। समीक्षा के दौरान पाया गया कि बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भी लाभ ले रहे हैं। इसके बाद इस विषय पर राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया, जिसके बाद अब विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है।

जांच पूरी होने के बाद अपात्र पाए जाने वाले मामलों में पेंशन निरस्त करने और वसूली जैसी कार्रवाई भी संभव मानी जा रही है।
