देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड में सुगंधित खेती को लेकर संसद में अहम मुद्दा उठाया गया। हरिद्वार से सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने “सुगंध क्रांति नीति” पर सवाल उठाते हुए किसानों की आय बढ़ाने और पहाड़ी क्षेत्रों में खेती को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।
सांसद रावत ने अपने प्रश्न में पूछा कि क्या राज्य सरकार ने “सुगंध क्रांति नीति 2026-36” लागू कर दी है, और इस दिशा में केंद्र सरकार की ओर से क्या आर्थिक व तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने पारंपरिक फसलों के विपणन और प्रसंस्करण को लेकर चल रही योजनाओं का भी ब्योरा मांगा।
इस पर कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि उत्तराखंड सरकार ने 23 सितंबर 2025 को “उत्तराखंड महक क्रांति नीति (2026-36)” को मंजूरी दे दी है। हालांकि यह राज्य प्रायोजित योजना है, इसलिए केंद्र सरकार की ओर से इसमें प्रत्यक्ष वित्तीय या तकनीकी सहायता नहीं दी जा रही है।
मंत्री ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की कई योजनाएं पहले से संचालित हैं। इनमें एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, एफपीओ योजना, राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन, प्राकृतिक खेती मिशन, परम्परागत कृषि विकास योजना और बागवानी विकास मिशन जैसी योजनाएं शामिल हैं।
साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाएं—जैसे पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, किसान मानधन योजना, डिजिटल कृषि मिशन और “नमो ड्रोन दीदी”—भी किसानों की आय बढ़ाने में सहायक बन रही हैं।
सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड की जलवायु और भौगोलिक स्थिति सुगंधित और औषधीय खेती के लिए बेहद अनुकूल है। “महक क्रांति नीति” के जरिए किसानों को नई दिशा मिलेगी और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने जोर दिया कि यदि केंद्र और राज्य की योजनाओं का बेहतर समन्वय किया जाए तो उत्तराखंड में मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को नई मजबूती मिलेगी। खासकर लघु और सीमांत किसानों के लिए एफपीओ, प्राकृतिक खेती, मधुमक्खी पालन और बागवानी आधारित मॉडल गेमचेंजर साबित हो सकते हैं।

अंत में सांसद रावत ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि “सुगंध क्रांति” के जरिए उत्तराखंड देश में एक नई पहचान स्थापित करेगा और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
